अपन गामकी एक कनकिर्वी

भागल भटकल सहर पहुची

न चिनल जानल कोही छै अपना

कनकिर्वी के लागलै सपना।।१ ।।


इमहर देखलै उमहर देखतै 

भैर दिन सहरमें लरलै चललै

थाकल शरिर अब भेलै उदास

भुखल पेटमे लागलै पियास ।।२ ।।


पाइन पियैला होटल ढुकलै 

जगमे पाइन उनका मिललै

पाइन घुटलै तब भेलै दरद

लागलै छातीमे अब फाटल ग्याल ।।३ ।।


कनकिर्वी के होस भेलै गुम

गिरलै शरिर जमिन पर धुम

दौडके बैसल एक जनाना आइ

कनकिर्वी के लडकी उठाइ ।।४ ।।


लागल दाँती कनकिर्वी बेहोस 

दाँती छुटाइ तब एलै उनका होस

कनकिर्वीके पुछल अव ग्याल

कते रहैचिए अखुन कि भ्याल ।।५ ।।


सहमी सहमी कनकिर्वी बोली 

कानेत मुखडा बनाके तै बोली 

खाली पेट छेलै पाइन पिलियै

भुखके कारन पेटमे दरद उठलै ।।६ ।।


नचिनल जानल कोही छै अपना

दिनमे अब हम देखियै सपना

बडबच बडनड कनकिर्वी बोली 

उनकी बात कुछ सियानी समझी ।।७ ।।


कनकिर्वीके नस्ता खिलाइ 

अपने साथ उसको घरलाइ

घरका कामकाज कनकिर्वी जिम्मा 

दिनका स्कुल लडकी के सगमा ।।८ ।।


दिदीके सगमें कनकिर्वी बडीभेली

आज कनकिर्वी पढलिख लेली

शुन्दर सस्कारी भाषा और बोली 

कनकिर्वीके भविष्य रंगलेली ।।९ ।।


गुरुमाँ दिदी बहिनी के बनौली

अछा जीवन कनकिर्वी के देली

सुखद भविष्यके देलै उदाहरण 

शुन्दर भविष्य दिदी बनाइ देली।।१० ।।

डमरु बल्लब भण्डारी